आँखों में खुद की तस्वीर दिखा के, लबों पे अपने होठों की प्यास जगा के जिस्म से रूह में उतरते हुए, एक चिंगारी से दिल में आग लगा के चले गए हो तुम हमें तड़पाके…. सुलगता रहा जिस्म, बुझी नहीं प्यास दिल में तुम्हारे आने की, लगी रही आस छूने को तुम्हे दिल चाहता रहा ये पागल तो मन ही मन मुस्काता रहा आहें भरते रहे, हम तड़पते रहे याद में तुम्हारी, दिन रात जलते रहे…. राह तकते नयन, अंगड़ाइयाँ लेता बदन वो बिस्तर की सिलवटें, वो अनछुआ एहसास तुम्हारे बिन तो हमें , आता नहीं कुछ रास आके हमें अब बाहों में भर लो नज़रों से अपनी हमसे बातें कर लो…. छोडो ये शर्म , ये लोगों की परवाह अब तो ज़िन्दगी में अपनी हमें शामिल कर लो…. नेहा….
जिन्दगी की तलाश थी, जिन्दगी ना मिली जिस खुशी की तमन्ना की, वो खुशी ना मिली ता-उम्र भटकते रहे हम, इक पल जीने के वास्ते वक्त ने बदल दिए, हर मंजिल के रास्ते तन्हा थे हम, बेबस थे कुछ खाख हो गए इस दिल की आँच से ना बची उम्मीद कोई, ना हौसला रहा उबरने का तूफानों ने उजाड़ दिए थे, किनारे हर समंदर के बिखर गए फिर ना सिमटे, जो टूट गए थे शाख से गिर गए नज़रों में अपनी, दुनिया वालों की बात से टुकडे बनके रह गए बस, संजोए जो ख्वाब थे मिट गए सब दिल से मेरे, अनकहे वो राज़ से ढूँढने जो उजाले गई, अंधेरे सिर्फ हाथ थे मेरे खुशियाँ थी खोई खोई सी, गम से भरे तालाब थे मेरे आज भी बैठे हैं जो लोगों से जुदा अब सितारों में खो गए हम चलो चलते हैं लेकर काफिला यादों का लो दुनिया से अजनबी हो गए हम। -----नेहा अग्रवाल
True lines 🙁
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