आज फिर तुझे पाने की चाह है,
आंखों में अपनी बसा लेने की चाह है,
तू माने या ना माने ये दिल जानता है,
फिर तुझमें समा जाने की चाह है...
..... नेहा अग्रवाल
आंखों में अपनी बसा लेने की चाह है,
तू माने या ना माने ये दिल जानता है,
फिर तुझमें समा जाने की चाह है...
..... नेहा अग्रवाल
Comments
Post a Comment